एनसीआरखास रिपोर्ट

यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच कराकर निर्दोष पाए जाने पर पत्रकार को फर्जी मुकदमे से बरी नहीं किया गया तथा दोषी पाए जाने वालो को दंडित नहीं किया गया तो पत्रकार व पत्रकार संगठनों को लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति की रक्षा के लिए अन्य कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा। नन्दगोपाल वर्मा

समाज विज्ञानी, पत्रकार हरि अंगिरा के खिलाफ जिला प्रशासन बुलंदशहर द्वारा एससीएसटी आदि धाराओं में फर्जी मुकदमा दर्ज कराये जाने के बाद पूरे क्षेत्र के सभी वर्गों में जिला प्रशासन के खिलाफ खुलकर नाराजगी व्यक्त की जा रही है!
चार दशक से विभिन्न समाचार पत्रों में संवाददाता और दो दशक तक बुलंदशहर से प्रकाशित दैनिक बरन पोस्ट के संपादक,प्रकशक रहे हरि अंगिरा 20 मई से कोरोना संकट में असंगठित वर्ग की सुरक्षा के लिए सरकार और शासन द्वारा दिये जा रहे निर्देश, शासनादेश के विपरीत जिला प्रशासन द्वारा बरती जा रही लापरवाही, अनियमितता के संबंध में तथ्य परक रिपोर्टिग कर रहे हैं! लगातार ऐसे मामले सामने लाये जाने से नाराज होकर इस कार्यवाही को अंजाम दिया गया
आ. अंगिरा जी पहले ही इस संबंध में आशंका व्यक्त कर चुके हैं!
भारत सरकार, सभी राज्य सरकारों द्वारा असंगठित वर्ग सुरक्षा, बाल महिला सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन जलवायु सुरक्षा, आदि जो कार्यक्रम संचालित कर रही है, वे सभी एक दशक से हरि अंगिरा द्वारा संचालित किये जाते रहे हैं! इन सभी कार्यकर्मो, योजनाओं को, fb- Hari Angira पर देखा जा सकता है!

 

नेशनल प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव नंद गोपाल वर्मा ने कहा कि बुलंदशहर प्रशासन द्वारा शासन से को रोना जंग से लड़ने वह जरूरतमंदों गरीब प्रवासी मजदूरों की सहायतार्थ आये ₹20 करोड रुपयों की चर्चा से उत्पीड़ित बुलंदशहर प्रशासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकार प्रमुख समाजसेवी हरि अंगिरा के विरुद्ध ईर्ष्या वश एक षड्यंत्र के तहत फर्जी मुकदमा दायर करवा के बदले की भावना वाली मानसिकता का परिचय दिया है। जो कि अति निन्दनीय है। प्रशासन ने ऐसा करके लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ पत्रकारिता पर कुठाराघात करने का कुत्सित प्रयास किया गया है हम समस्त पत्रकार साथी बुलंदशहर प्रशासन की तीव्र भर्त्सना करते हैं और प्रधानमंत्री जी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से सीबीआई से उक्त प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग करते हैं। यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच कराकर निर्दोष पाए जाने पर पत्रकार को उक्त फर्जी मुकदमे से बरी नहीं किया गया तथा दोषी पाए जाने वालो को दंडित नहीं किया गया तो पत्रकार व पत्रकार संगठनों को लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति की रक्षा के लिए अन्य कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा

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