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दादरी में बचपन ब्रेन स्कूल, मोहल्ला मेवातियांन, कटेहरा रोड, दादरी में विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का हुआ आयोजन

दादरी में बचपन ब्रेन स्कूल, मोहल्ला मेवातियांन, कटेहरा रोड, दादरी में विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का हुआ आयोजन

ग्रेटर नोएडा ।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है। इस अभियान का दूसरा चरण, ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’, पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव के साथ जोड़ता है।यह लोगों को अपनी माताओं के सम्मान में एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे पर्यावरण के प्रति जागरूकता एक व्यक्तिगत और भावुक कार्य बन जाती है। इसी कड़ी में, बचपन ब्रेन स्कूल, मोहल्ला मेवातियांन, कटेहरा रोड, दादरी में एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने इस अभियान को एक नई गति दी।

बचपन ब्रेन स्कूल की पहल

बचपन ब्रेन स्कूल, जो हमेशा से शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखता, उसने इस नेक पहल को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया। स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. अशरफ रहमान के नेतृत्व में, यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसमें स्कूल की शिक्षिकाओं और जूनियर कक्षाओं के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।छोटे बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ अपने नन्हे हाथों से पौधे लगाए, जो न केवल पर्यावरण के लिए एक निवेश है, बल्कि उनके भविष्य के लिए भी एक सबक है। इस तरह के कार्यक्रम बचपन से ही बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और प्रेम की भावना को विकसित करते हैं।

अभियान का उद्देश्य और महत्व

‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। लेकिन इसका तरीका बेहद खास है। यह अभियान सिर्फ पेड़ लगाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह इसे अपनी माँ के प्रति प्रेम और सम्मान से जोड़ता है। माँ, जो हमें जीवन देती हैं, उसी तरह पेड़ भी हमें जीवन देते हैं।माँ हमें पालती-पोसती हैं, और पेड़ हमें स्वच्छ हवा, पानी और भोजन देते हैं। इस भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से, यह अभियान हर व्यक्ति को यह महसूस कराता है कि पेड़ लगाना केवल एक सरकारी योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत कर्तव्य और भावनात्मक श्रद्धांजलि है। डॉ. अशरफ रहमान ने अपने संबोधन में इस अभियान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है, लेकिन इसकी शुरुआत व्यक्तिगत प्रयासों से होती है। जब हम अपनी माँ के नाम पर एक पेड़ लगाते हैं, तो यह न केवल पर्यावरण को लाभ पहुंचाता है, बल्कि यह हमारे भीतर प्रकृति के प्रति एक गहरा सम्मान भी पैदा करता है।” उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी माताओं और ‘धरती माँ’ दोनों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पेड़ लगाएं।यह अभियान सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक लंबी यात्रा की शुरुआत है। जब एक बार कोई व्यक्ति अपनी माँ के नाम पर एक पौधा लगाता है, तो वह उसकी देखभाल भी करता है, जैसे कि माँ अपनी संतान की करती है। यह निरंतर जुड़ाव हमें प्रकृति के करीब लाता है और हमें उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।बचपन ब्रेन स्कूल में हुआ यह कार्यक्रम एक प्रेरणा है कि कैसे शैक्षणिक संस्थान और समुदाय मिलकर बड़े अभियानों को सफल बना सकते हैं। बच्चों ने जिस उत्साह और खुशी के साथ पौधे लगाए, वह दर्शाता है कि नई पीढ़ी पर्यावरण के प्रति कितनी संवेदनशील है। आने वाले समय में ऐसे और भी कार्यक्रमों की आवश्यकता है ताकि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की भावना हर घर और हर दिल तक पहुँच सके।

अंत में, यह अभियान हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है: हमारा पर्यावरण हमारी माँ की तरह है। इसकी देखभाल करना और इसे हरा-भरा रखना हमारा परम कर्तव्य है।इस अभियान के माध्यम से, हम न केवल अपनी माताओं का सम्मान करते हैं, बल्कि अपनी धरती माँ को भी एक बेहतर भविष्य देते हैं। यह एक ऐसा कदम है, जो पर्यावरण और समाज दोनों के लिए सकारात्मक बदलाव लाएगा।

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